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मॉडल गाँव

बुंदेलखंड में जनता और प्रशासन के आपसी सहयोग और विश्वास से प्रशस्त हुआ प्रगति का मार्ग

जनपद बाँदा के अभावग्रस्त ग्रामीण समुदाय और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर बहुआयामी गतिविधियों के माध्यम से एक अभिनव प्रयोग किया, जो पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए प्रकाश-स्तम्भ साबित हो सकता है।

जनता और प्रशासन के बीच कृषि सम्बन्धी मुद्दों पर चर्चा (छायाकार : सौरभ लाल)

जनपद बाँदा बुन्देलखण्ड का एक समस्याग्रस्त जनपद है। यह बेराजगारी, गरीबी और दस्यु समस्याओं से बुरी तरह प्रभावित है। यहाँ की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। लेकिन पानी का गंभीर संकट अर्थव्यवस्था विकास की किसी भी सम्भावना के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। न केवल कृषि सिंचाई, बल्कि पीने के पानी की यहाँ भारी किल्लत रहती है।

क्षेत्र की जनता के जीवन में खुशहाली लाने और उन्हें गरीबी एवं बेरोजगारी से निजात दिलाने का एकमात्र टिकाऊ रास्ता है, कृषि से होने वाली आय में वृद्धि। यहाँ की परिस्थितियों के गहन अध्ययन से स्पष्ट होता है, ऐसा कृषि को कृषि-व्यापार में बदलकर ही किया जा सकता है।

पहला कदम – जागरूकता

कृषि को कृषि-व्यापार में बदलने के लिये सबसे पहले जनता को इस मुद्दे पर जागरूक करना जरूरी है। युगों से चली आ रही समस्याओं और उनसे दो-चार होते रहने की आदत के चलते, स्थानीय समुदायों के लिए बड़े बदलाव को मानसिक रूप से स्वीकार करना आसान नहीं होता। यह जरूरी है, कि वे बेहतर जीवन की कल्पना करें, उसकी सम्भावना देखें और अपने सपने को साकार करने के लिए प्रयास करने के लिए तैयार हो जाएं। 

यह मानसिक बदलाव मुश्किल जरूर है, लेकिन असम्भव नहीं है। जहां चाह वहां राह की सोच के आधार पर जनपद बाँदा में यह सम्भव हुआ। (जानिए: मॉडल गाँव) सोच को बदलने के लिये, सबसे पहले एक तीन-दिवसीय (28 से 30 जनवरी, 2019) नवाचार (innovation) सम्मलेन का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से यहाँ की पानी, कुपोषण, बेरोजगारी, अन्नाप्रथा आदि समस्याओं के समाधान ढूँढ़ने का एक सफल अभिनव प्रयेाग किया गया। इस अनोखे तीन-दिवसीय सम्मलेन की सफलता के दो प्रमुख आयाम रहे। पहला यह कि स्थानीय लोगों में यह एक उत्सव के रूप में जागरूकता प्रदान कर सका। दूसरे, इसने आमजन को जिला प्रशासन के साथ जोड़ने में प्रभावी भूमिका निभाई। 

लोकतान्त्रिक प्रक्रियाएं

इस प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण चरण था, सम्मलेन से पैदा हुई ऊर्जापूर्ण सोच को लोक सभा के चुनाव की तरफ मोड़ते हुए, लोगों का लोकतंत्र और लोकतान्त्रिक संस्थाओं में विश्वास बढ़ाना। बाँदा की छवि को सुधारने और बाँदा की शान बढ़ाने में आम जनता की लोक तंत्र को मजबूत बानने में महत्वपूर्ण भूमिका के उद्देश्य से ‘90 प्रतिशत हो मतदान, बाँदा बना देश की शान’ का नारा दिया गया। इसमें पूरे जनपद की आम जनता की सक्रिय भागीदारी रही और यहाँ प्रदेश में मतदान प्रतिशत में सर्वाधिक 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

इस चुनावी अभियान में जनता और जिला प्रशासन के बीच की दूरी काफी हद तक कम हो गई। जनता को यह अहसास होने लगा कि हमारे जिलाधिकारी यहाँ की समस्याओं को हल करना चाहते हैं। लोगों को आश्वस्त करने की दिशा में, जिलाधिकारी, श्री हीरा लाल की बिना किसी दिखावे के कार्य करने के तरीके की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जनता में यह विश्वास एक के बाद एक हुए कार्यक्रम से बढ़ता गया और उनके बीच की दूरी घटती गयी। दूरगामी परिणामों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है।

जल संकट निवारण

अगली समस्या, जिसपर ध्यान केंद्रित किया जाना था, वह थी पानी की समस्या, जिसके बिना यहाँ किये गए सभी प्रयास अपर्याप्त होते। पानी की समस्या के समाधान की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इसकी शुरुआत जल संरक्षण अभियान, ‘कुँआ, तालाब में पानी लायेंगे और बाँदा को खुशहाल बनायेंगे’ नारे के साथ की गई। इसका सबसे प्रमुख पक्ष था, जन सहभागिता। जनपद में कुँआ, तालाब और नदी पर यथायोग्य काम करके, बरसाती पानी को संरक्षित किया गया। इसका परिणाम यह हुआ, कि बाँदा में भूजल स्तर में लगभग 1.34 मीटर (4.5 फ़ीट) की वृद्धि हुई।

भूजल स्तर में वृद्धि और कुओं, तालाबों और नदी में पानी की उपलब्धता और अवधि में बढ़ोत्तरी होने के फलस्वरूप, जनपद में फसल उत्पादकता लगभग 18.4 प्रतिशत बढ़ी। कृषि क्षेत्र में तकनीक और उपयुक्त जानकारी देने के लिए, दो उत्कृष्ठता केंद्र (एक्सीलेन्स सेन्टर) बनाने की दिशा में प्रयास किए गए, जिनमें से एक केंद्र का निर्माण कराया जा चुका है।

कृषि केंद्रित पहल

बाँदा सहित पूरे बुन्देलखण्ड क्षेत्र की भूमि तिलहन और दलहन की फसल के लिए बहुत उपयुक्त है। इस वर्ग की फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए और इसकी मांग को बढ़ाने के लिये कई ठोस प्रयास किए गए। इनमें अरहर सम्मलेन प्रमुख है। यह सम्मेलन विश्व प्रसिद्ध कालिंजर फोर्ट की तलहटी में अरहर के एक खेत में आयोजित किया गया। इसमें कृषि पर्यटन के आयाम को भी जोड़ा गया। अरहर सम्मेलन के बाद फोर्ट भ्रमण कर लोगों ने कृषि पर्यटन की सोच को मूर्तरूप दिया। 

छात्रों की भागीदारी

क्योंकि किसी भी नवाचार-आधारित सामुदायिक प्रयास में छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, इसलिए बहुत से छात्र केंद्रित गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें प्रमुख हैं – छात्र निर्माण संवाद, एक दिन का अधिकारी (फिल्म एक दिन का मुख्यमंत्री के आधार पर) पेड़ जिआओ अभियान, कुपोषण मुक्त बाँदा, प्लास्टिक मुक्त-झोला युक्त बाँदा, जेल सुधार अभियान, कांलिजर महोत्सव, केन नदी आरती अभियान, आदि। कुल मिलाकर ऐसे 20 से ज्यादा नवाचार किये गए।  

लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं की मजबूती की दिशा में जागरूकता जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है जन सहभागिता और प्रशासनिक सहयोग (छायाकार : सौरभ लाल)

इन सभी प्रयासो में सिद्धांत के रूप में 3 मुख्य बिन्दु प्रयोग किये गये –

1.       सभी सम्बन्धित वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित कराना।

2.       ऐसी गतिविधियों का आयोजन, जिनमें धन की आवश्यकता न हो या लागत कम हो।

3.       विभिन्न विभागों और जनपद में उपलब्ध धन, संसाधन, ज्ञान आदि के एकाकीकरण की व्यवस्था संभव होना।

क्षेत्र में प्रतिध्वनि

इस प्रकार, चुनाव, पानी और कृषि उत्पादकता सम्बन्धी कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की सोच बनी, उनमें जोश का संचार हुआ और उन्होंने एक सपने को वास्तविकता में बदलने की सम्भावना देखनी शुरू की। पूरे जनपद की जनता जैसे नींद से जाग कर, निराशा के भाव को आशा में बदलकर, बाँदा को एक नया माॅडल बनाने की दिशा में निकल पड़ी।

अपने इन सभी प्रयोग के कारण बाँदा, अगस्त 2018 से फरवरी 2020 तक लगातार प्रदेश, देश और विदेश में नवाचार कार्यों के लिए और उनसे प्राप्त होने वाले सकारात्मक परिणामों के कारण सुर्खियों में बना रहा। इसने सिद्ध कर दिया, कि जनता और प्रशासन यदि आपसी विश्वास और तालमेल से काम करें, तो क्षेत्र का विकास और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार निश्चित हैं। 

डॉ हीरा लाल – तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, बांदा, यू.पी. ने कई समावेशी विकास पहलों की अवधारणा और कार्यान्वयन किया है । ईमेल : heeralalias@gmail.com
विचार व्यक्तिगत हैं ।

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