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आपदा में अवसर

नर्मदा बांध के जल भराव क्षेत्र और दुर्गम पहाड़ियों के बीच, विकास के लिए छटपटाते समुदाय को, महामारी ने प्रस्तुत की बेहतर जीवन की संभावनाएं

जीवन यापन के सीमित विकल्पों वाले सोण्डवा क्षेत्र में विकास की पहल के लिए भी हालात अनुकूल नहीं। ऐसे में महामारी से पैदा हुई चुनौतियों ने प्रस्तुत की, कुछ बेहतरीन संभावनाएं।

सरदार सरोवर बांध के जल भराव क्षेत्र (छायाकार - अमन हैदर)

अलीराजपुर जिला देश के सबसे गरीब क्षेत्रों में से एक है। ऑक्सफ़ोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) की सूची के अनुसार, 2015-16 में अलीराजपुर भारत का सबसे ज्यादा बहु-आयामी गरीबी से ग्रस्त जिला था, जहाँ 76.5% लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे थे। 

जिले के सोंडवा ब्लॉक की परिस्थितियाँ और भी ज्यादा विकट हैं। इसकी भोगौलिक स्थिति अनोखी है। यह एक ओर सरदार सरोवर बांध के जल भराव क्षेत्र और दूसरी ओर दुर्गम पहाड़ियों के बीच घिरा है। भिलाला समुदाय के आदिवासियों का घर, सोंडवा सामान्य जीवन और आजीविकाओं के लिए अनेक चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है। 

सतत चुनौतियाँ एवं संघर्ष

यातायात एवं संचार 

भोगौलिक स्थितियों के कारण, यहाँ के ग्रामीणों के लिए यातायात के साधन बहुत ही सीमित हैं। शहर जाने के लिए उन्हें या तो नाव से बांध की धाराओं को पार करना पड़ता है, जिनकी उपलब्धता बेहद कम है, या उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। संचार और संपर्क की सुविधाएं भी नाम मात्र की हैं। 

सरदार सरोवर बांध के जल भराव क्षेत्र और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित सोण्डवा ब्लॉक का एक गाँव (छायाकार – अमन हैदर)

ऊंची नीची जमीन पर घर भी दूर-दूर हैं। यह स्थिति न केवल समुदाय के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी एक समस्या है, बल्कि किसी भी विकास के लिए की गई पहल के रास्ते में एक बाधा है। समूहों के साथ काम करना, उनकी नियमित बैठकें, सूचना का आदान-प्रदान और तालमेल बेहद मुश्किल है। 

शिक्षा एवं स्वास्थ्य 

यह सर्व-मान्य है, कि शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह बेहतर आजीविका और अपने अधिकारों एवं प्रावधानों के प्रति जागरूकता के लिए उपयोगी साधन भी है। वर्ष 2011 में, सोण्डवा की साक्षरता दर केवल 32% (महिलाओं में मात्र 25%) थी। 

कमजोर यातायात और संपर्क सुविधाओं के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक समुदाय की पहुँच बेहद कम है। कम उम्र में गर्भ एवं उससे जुड़ी जटिलताएं, भोजन के सीमित विकल्पों के कारण कुपोषण और ठहरे हुए अस्वच्छ पानी के कारण चर्म-रोग यहाँ की आम समस्याएं हैं।

आजीविकाएं 

बेहद उबड़-खाबड़ एवं ख़राब जमीन, अनियमित एवं अनिश्चित बारिश, सिंचाई सुविधाओं का अभाव ऐसी बाधाएं हैं, जिनके कारण कृषि सम्बन्धी विकल्प सीमित और अपर्याप्त हैं। इसका सीधा प्रभाव उनके स्वास्थ्य और आय पर पड़ता है। कृषि के अलावा, मछली पालन आय का दूसरा माध्यम है, जिस पर बहुत से परिवार निर्भर करते हैं। 

ऊबड़-खाबड़ और घटिया स्तर की जमीन कृषि के लिए पर्याप्त आय अर्जित नहीं करती (छायाकार – अमन हैदर)

न्यूनतम स्तर के जीवन यापन के साधन भी न जुटा पाने के कारण, यहाँ के युवाओं को बड़ी संख्या में पलायन करना पड़ता है। वे वहां साल का एक बड़ा हिस्सा परिवार के गुजारे के लिए, मजदूरी करते हुए गुजारते हैं। 

विकास के लिए पहल एवं बाधाएं 

इस क्षेत्र में विकास के लिए बहुत कम प्रयास हुए हैं, इसलिए अनुभवों का एक विश्वसनीय ब्यौरा नहीं मिलता। क्योंकि सोण्डवा के लोग बाहरी संगठनों के कार्यों के आदी नहीं हैं, इसलिए उनमें भरोसे और विश्वास का अभाव है। ऐसे में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) के 2018 में शुरू हुए प्रयास काफी समस्याओं के बीच से गुजर रहे थे।  

मध्य प्रदेश का यह ब्लॉक, भोगौलिक रूप से राजस्थान और महाराष्ट्र की सीमाओं के नजदीक है। इसलिए, यहाँ के लोगों की बातचीत कई बोलियों से प्रभावित है और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बदल जाती है। इस कारण किसी भी कार्यकर्ता के लिए यहाँ के समुदाय के साथ संवाद जटिल और कठिन हो जाता है और यह उन्हें हतोत्साहित करता है।    

व्यापक स्तर पर पलायन होने के कारण, लोगों के एक निश्चित समूह के साथ काम करना आसान नहीं है। जब तक समुदाय स्तर पर एक टिकाऊ इकाई बनने लगती है, कुछ लोग पलायन कर जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है, कि कोई भी कार्यक्रम योजनानुसार लागू करने में दिक्कत होती है। 

ऊपर उल्लेखित चुनौतियों की प्रकृति और क्षेत्र की भोगौलिक जटिलता के चलते, सोण्डवा में मनोबल बना कर रखना किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता के लिए मुश्किल है। इसलिए उनके काम छोड़ कर चले जाने की दर बहुत ज्यादा है, जिस कारण किसी भी पहल का सुचारू संचालन, उसके प्रभाव और इसलिए धन की उपलब्धता प्रभावित होती है। 

TRIF और समुदाय  

TRIF ने सोण्डवा ब्लॉक में बहु-आयामी बदलाव की दिशा में काम शुरू किया। संगठन यहाँ की महिलाओं का “बदलाव-दीदी” नाम से एक कैडर बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसके माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को जानकारी और शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।

बदलाव दीदी प्रशिक्षण विकास कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण कदम है (छायाकार – अमन हैदर)

वर्ष 2018 में अपने कार्यों की शुरुआत से ही, TRIF ने लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन-प्रणाली (गवर्नेंस) के मुद्दों पर प्रशिक्षण देने के लिए, विशेषज्ञों को शामिल किया था। अपने “मिशन अंत्योदय” के माध्यम से बदलाव के बारे में उनकी सोच को समझने के लिए क्लस्टर स्तरीय फेडरेशनों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 

अधिक से अधिक सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, 70 से ज्यादा गाँवों के ग्राम विकास योजनाएं तैयार करने और उनके साथ सामुदायिक कार्य योजनाओं को जोड़ने के लिए काम हुआ। इसके अलावा, 100 गाँवों में 14 लोगों की टीम नियुक्त करके, ‘प्रावधान परिपूर्णता कार्यक्रम’ (Entitlement Saturation Program) की शुरुआत की गई।   

आपदा ने प्रदान किए अवसर 

वैसे तो COVID-19 महामारी से जल भराव प्रभवित इस क्षेत्र के बाहर भी दुनिया संघर्ष कर रही थी, लेकिन यहाँ के समुदाय की समस्याएँ कई स्तर की थी। न यातायात के लिए नाव चल रही थी, न ही भोजन और दवाइयां आसानी से उपलब्ध हो रही थी। 

लेकिन महामारी से बढ़ी समस्याओं को देखते हुए, TRIF ने अपने कार्यों की गति को और तेज किया। प्रवास से लौटने वाले ग्रामीणों के लिए क्वारंटाइन सुविधाओं का निर्माण, सामाजिक दूरी के नियमों को लागू करने के प्रयास, परोक्ष (वर्चुअल) बैठकों का आयोजन, आदि किया। ग्रामीणों की चिकित्सा सुविधा और ‘डूब’ (जलमग्न इलाके) में फंसे लोगों को निकालने के दोहरे उद्देश्य से नाव-एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। 

उपचार सुविधा और डूब में फंसे लोगों को निकालने के उद्देश्य से तैनात की गई नाव-एम्बुलेंस (छायाकार – अमन हैदर)

लोगों में बढ़ी जागरूकता ने कुछ हद तक उन्हें इस संकट से उबरने में मदद तो की ही, साथ ही उनमें समुदाय की अगुआई वाले ऐसे कार्यक्रमों के प्रति सामूहिक स्वामित्व की भावना भी पैदा की है। इसके दूरगामी प्रभाव होंगे और पहले से जारी कार्यक्रमों को जोरदार बढ़ावा मिलेगा।

महामारी से आया यह बदलाव इस संघर्षमय समुदाय के लिए विकास यात्रा की एक नई शुरुआत हो सकती है। लेकिन इसके लिए सरकार और परोपकारी संस्थाओं/व्यक्तियों को इन लोगों के लिए अवसर पैदा करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश करना होगा। 

इस क्षेत्र में कृषि, मछली पालन, गैर-टिम्बर वनोपज के रूप में संभावनाएं असीम हैं, लेकिन उनका उचित उपयोग तभी हो सकेगा, जब धन को इस ब्लॉक और इस क्षेत्र की ओर मोड़ा जाए। चुनौतियाँ कठिन हैं, लेकिन आपदा की इस घड़ी में पैदा हुई परिस्थितियों ने कुछ बेहतरीन अवसर प्रदान किये हैं, जो थोड़े सहयोग और देखरेख से बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

अमन हैदर TRIF, भोपाल से जुड़े हुए है| विचार व्यक्तिगत हैं।

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