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टेली-स्वास्थ्य सेवा

टेक्नोलॉजी द्वारा ग्रामीणों को दूर स्थानों से स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त में मदद मिलती है

एक तकनीकी ऐप, ई-संजीवनी, ग्रामीण रोगियों को मोबाइल फोन के माध्यम से डॉक्टरों से परामर्श लेने में मदद करता है। यह महामारी और लॉकडाउन के समय दूरदराज़ स्थानों से COVID-19 संबंधी परामर्श के लिए सहायक हुआ है

यहां एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिख रहे स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, ई-संजीवनी के माध्यम से ग्रामीणों को टेली-मेडिसिन परामर्श प्रदान करने में सक्षम हुए हैं।

इन दिनों COVID-19 के लिए टेली-परामर्श शहरों में काफ़ी हद तक एक सामान्य बात हो गई है। हमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में संक्रमित लोगों के संपर्क में आने का डर रहता है। हम समझते हैं कि अस्पतालों के लाउन्ज और निजी क्लीनिकों में संभावित COVID-19 रोगियों के साथ इंतजार करना थोड़ा जोखिम भरा है।

यदि इसे टाला जा सके, तो यात्रा में होने वाला खर्च और समय भी हमें व्यक्तिगत रूप से परामर्श प्राप्त करने में हिचकिचाहट पैदा करते हैं। इन सभी कारणों से शहरी, कंप्यूटर के जानकार, एंग्लोफोन नागरिकों को उत्साहपूर्वक टेली-परामर्श अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

COVID-19 महामारी के अपने इस उग्र रूप में आने से पहले ही, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आम रोगियों को डॉक्टरों से टेली-परामर्श के लिए ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म शुरू कर दिया था। तकनीकी पक्ष पर पिछड़े राज्य, झारखंड ने COVID-19 के ग्रामीण रोगियों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए इस मंच का उपयोग किया है।

झारखंड इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट फॉर हेल्थ एंड न्यूट्रिशन (JIDHAN), अजीम प्रेमजी फिलांथ्रोपिक इनिशिएटिव (परोपकारी पहल) के सहयोग और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) द्वारा कार्यान्वित एक परियोजना है। JIDHAN परियोजना में, TRIF अपने तकनीकी सहभागी, Intelehealth (इनटेलीहेल्थ) के साथ, ई-संजीवनी मंच की सेवा को सक्रिय करने और राज्य में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए, काम कर रहा है। यह राज्य के रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा जिलों के 15 प्रशासनिक ब्लॉकों में काम करता है।

JIDHAN परियोजना ने दिखाया है कि कैसे ई-संजीवनी मंच, न केवल इन जिलों में बल्कि पूरे राज्य में, घर पर अलग रह रहे और दूसरे ग्रामीण COVID-19 रोगियों के साथ-साथ, अन्य बीमारियों के रोगियों को भी सहायता प्रदान कर सकता है।

टेली-परामर्श

झारखंड में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में ग्रामीण स्तर पर आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) और स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (HWC-जिसे पहले उप-स्वास्थ्य केंद्र कहा जाता था) शामिल हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) और ANM (सहायक नर्स और दाईयां) इसे चलाने में मदद करते हैं।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पंचायत स्तर पर पंचायतों के एक समूह में जनसंख्या के आधार पर या ब्लॉक स्तर पर काम करते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) प्रशासनिक ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करते हैं। जिला अस्पताल जिला स्तर पर कार्य करता है।

आदिवासी और ग्रामीण आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए टेली-परामर्श की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, और उनके लिए डॉक्टरों तक पहुंचना आसान बनाने के लिए, ये सेवाएं शुरू की गईं।

ई-संजीवनी मंच

ई-संजीवनी पर पंजीकरण, डॉक्टरों का समूह और परामर्श सेवाओं का समय राज्य के लिए विशिष्ट है, और इसलिए रोगी बिना किसी भाषा की बाधा के, आसानी से इससे जुड़ सकता है। इस सेवा के सामान्य कामकाजी घंटे इस प्रकार हैं – सामान्य ओपीडी के लिए सुबह 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक और रविवार को छोड़कर प्रत्येक दिन दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक। विशेषज्ञों के लिए, विशेषज्ञता के अनुसार यह अलग-अलग दिनों में दोपहर 1 से 2 बजे तक और दोपहर 2 से 3 बजे तक रहता है।

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा विकसित और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू किए गए, ई-संजीवनी मंच के दो मॉडल हैं। ई-संजीवनी ओपीडी मॉडल डॉक्टरों और मरीजों के बीच सीधे संपर्क की सुविधा प्रदान करता है।

दूसरे मॉडल में मरीज HWC में जाते हैं और स्वास्थ्य विभाग के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और ANM की मदद से डॉक्टरों से बातचीत करते हैं। JIDHAN ई-संजीवनी मंच की सेवा को सक्रिय करने और राज्य में इसकी पहुंच बढ़ाने पर काम कर रहा है।

ओपीडी मॉडल में, एक एंड्रॉइड फोन वाला व्यक्ति ई-संजीवनी मंच पर पंजीकरण करके लॉग इन करता है, एक सामान्य चिकित्सक या विशेषज्ञ को ढूंढ कर उससे समय लेता है और परामर्श प्राप्त करता है।

HWC मॉडल में, प्रत्येक प्रशिक्षित CHO को एक लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया जाता है, जो उसे ई-संजीवनी मंच का उपयोग करने की अनुमति देता है। इस मॉडल में, मरीज के सेंटर पर आने पर CHO या ANM डॉक्टर से संपर्क करते हैं। CHO या ANM नाड़ी, तापमान, धड़कन, जीभ की जांच, रक्तचाप आदि की जांच करके, उनकी जानकारी डॉक्टर को देते हैं, जिससे परामर्श में मदद मिलती है।

दवा का नुस्खा

परामर्श के बाद, डॉक्टर इलाज के लिए एक नुस्खा भेजता है। इस नुस्खे को डाउनलोड किया जा सकता है और इसे HWC/PHC/CHC/जिला अस्पताल के सरकारी औषधालयों के साथ-साथ, निजी मेडिकल स्टोर से नुस्खे में लिखी दवाएं प्राप्त करने के लिए कानूनी मान्यता है।

रांची के अंगारा ब्लॉक की बीया पंचायत की निभादेवी का कहना है – ‘ई-संजीवनी आने से मैं बहुत खुश हूं। मैं अपने फोन से पंजीकरण और लॉग इन कर सकती हूँ। डॉक्टर बहुत उदार थे और न केवल मेरी समस्या और लक्षणों को समझते थे, बल्कि यह भी बताते थे कि मुझे क्या करना चाहिए। उनके जो दवाइयां सुझाई, वह उपलब्ध थीं। मैं अपने और अपने परिवार के लिए हमेशा ई-संजीवनी का इस्तेमाल करूंगी।”

डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, आवश्यक दवा सूची (EDL) को स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ डॉक्टरों के साथ भी साझा किया गया है। सूची को ई-संजीवनी ऐप में भी एक सूची के रूप में डाला गया है, ताकि डॉक्टर इनमें से चुन सकें। डॉक्टरों को EDL (एसेंशियल ड्रग लिस्ट) से दवाएं लिखने की हिदायत दी गई है, जो आमतौर पर स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध होती हैं।

प्रशिक्षण और जागरूकता

JIDHAN परियोजना के अंतर्गत, 15 प्रखंडों की 178 पंचायतों में, सभी CHO और ANM को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ, इस सुविधा के बारे में समुदायों को जागरूक करने का गहन कार्य किया गया है। अब तक इन प्रखंडों के लगभग 40% CHO/ANM को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अन्य जिलों से लगभग 60 और लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, और ज्यादा को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया चल रही है।

JIDHAN परियोजना क्षेत्र के 15 प्रखंडों की 178 पंचायतों में, पंचायत स्वास्थ्य सुगमकर्ता (PHFs) को समुदाय के साथ मिलकर काम करने के लिए नियुक्त किया गया है। वे अभिमुखीकरण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, ताकि वे समुदाय में जागरूकता फैला सकें।

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था (PHC, CHC, जिला अस्पताल) के लगभग 20 चिकित्सा अधिकारियों ने इस व्यवस्था में नामांकन किया है और नियमित रूप से अपनी उपलब्धता के बारे में सूचित करते हैं और परामर्श के लिए अपने समय तय करते हैं। इतने ही विशेषज्ञ, रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस और देवगढ़ के एम्स से परामर्श प्रदान करते हैं।

लॉकडाउन के समय चिकित्सा परामर्श

महामारी काल में यह व्यवस्था बहुत उपयोगी सिद्ध हो रही है। विशेष रूप से, घर पर अलग रह रहे COVID-19 रोगी उचित चिकित्सा सलाह और दवा के नुस्खे प्राप्त कर पाते हैं। अन्य बीमारियों से पीड़ित दूसरे लोग भी टेली-परामर्श का उपयोग करके, इस कठिन समय में यात्रा करने से बच सकते हैं।

अक्टूबर 2020 से, जब ई-संजीवनी मंच को सक्रिय करने के लिए ठोस प्रयास शुरू हुए, तब से राज्य भर में 6,000 से ज्यादा टेली-परामर्श सत्र हो चुके हैं। रांची और खूँटी जिलों के ग्रामीणों ने 1,500 से अधिक टेली-परामर्श पंजीकरण करके, ई-संजीवनी मंच के उपयोग से सबसे ज्यादा फायदा उठाया है।

ज्यादातर परामर्श COVID-19 से संबंधित हैं। इस समय दैनिक ‘टोकन’ की संख्या – जो परामर्श के लिए समय लेने वाले लोगों को जारी होते हैं – 75 से ज्यादा हैं और इनमें से कम से कम 60% का नतीजा असल में परामर्श के रूप में होता है।

इस प्रकार प्रौद्योगिकी, राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अपेक्षाकृत कम विकसित और खराब संपर्क प्रणाली वाले राज्य में भी आसानी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में मदद करती है, विशेषकर महामारी के समय, जब आवागमन सीमित है।

प्रवीर महतो झारखंड में JIDHAN परियोजना के लिए TRIF में कार्यक्रम अधिकारी हैं। विचार व्यक्तिगत हैं। ईमेल: praveer@trif.in

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