November 24, 2020

पितृसत्ता, स्थिरता और लज्जा

ग्रामीण विकास के मौजूदा मॉडल की रूपरेखाओं में, जेंडर-लैंस का अभाव है, जो महिलाओं को उनकी सीमांकित भूमिका में छोड़ देता है, और इस दिशा में प्रगति या सशक्तिकरण कहीं दिखाई नहीं पड़ता

November 19, 2020

ग्रामीण महिलाओं के समूह सशक्तिकरण के लिए हैं

गाँवों में स्व-सहायता समूह, महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण प्रदान करते हैं, जिससे अपने मामलों को सँभालने की उनकी क्षमता को लेकर व्याप्त धारणाएं बदल गई हैं

October 27, 2020

ग्रामीण भारत में हैंडलूम क्या केवल गरीबी बुनने में सक्षम हैं?

हमें इस बात पर विचार करने की जरूरत है, कि जो कभी ख़ुशियाँ, संस्कृति और आय बुनता था, वो हैंडलूम (हथकरघा) क्यों आज केवल गरीबी बुनता है? यदि कुछेक बाहरी तत्वों को छोड़ दें, तो यह क्यों हमारे ग्रामीण लोगों की आजीविका को बनाए रखने में असमर्थ है?

October 2, 2020

केवल उपेक्षित भारत गाँवों में रहता है!

महात्मा गांधी के जन्मदिवस के अवसर पर, ग्रामीण भारत पर एक नज़र डालने पर पता चलता है कि हम उनके ‘आत्मनिर्भर गाँव’ के आदर्शों से बहुत पीछे रह गए हैं। इसका एक कारण आधुनिक समय में बदली हुई आकांक्षाएँ हैं।