July 28, 2020

क्या एक नुकीला कुदाल एक मोती में छेद कर सकता है?

ग्रामीण भारत में समाज के बिखरे और अलग-थलग किए वंचित समूहों तक कल्याणकारी सेवाएं पहुंचाने में गंभीर चुनौतियां हैं, और इनसे निपटने के लिए सरकारी-तंत्र सक्षम नहीं है।

July 21, 2020

लौटे प्रवासी: निराशा और सामंजस्य

काम के स्थान (शहर) की दूरी, नियोक्ता (मालिक) की नौकरी देने की प्रतिबद्धता और मूल गाँव में आजीविका के अवसर, लौट कर आए प्रवासियों के फैसले का आधार हैं, कि वे लॉकडाउन समाप्ति के बाद प्रवास करें या नहीं। तब तक वे उपलब्ध संसाधनों से ही सामंजस्य बैठाते हैं

July 14, 2020

लौटे प्रवासी: एक विराम या एक सपने का अंत?

लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों को घर लौटने के लिए मजबूर कर दिया है। नकद बचत के बिना और काफी समय से फंसी पगार के कारण, उनका भविष्य इतना अनिश्चित है, जितना पहले कभी नहीं था

May 28, 2020

लॉकडाउन दूरदराज के आदिवासी छात्रों की शैक्षणिक सीख को पलट देगा

दूरदराज के गांवों में रहने वाले पहली पीढ़ी के छात्रों के लिए, सरकार द्वारा कार्यान्वित लॉकडाउन के दौरान, घर पर रह कर पढ़ाई के लिए ऑनलाइन और सामुदायिक संसाधनों की कमी है। इस समय के नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें दोबारा वही पढ़ाई करने की ज़रूरत होगी|