July 23, 2020

अनाज के योगदान के माध्यम से महिलाएं कर रही हैं लॉकडाउन में कमजोर परिवारों की मदद

तालाबंदी के बीच काम के अभाव में, दूरदराज के गांवों में कई महिलाओं के पास अपने परिवार का पेट भरने के लिए आवश्यक सामग्री भी नहीं थी। साथी महिलाओं ने योगदान करके एक फूड बैंक बनाकर उनकी मदद की

July 21, 2020

लौटे प्रवासी: निराशा और सामंजस्य

काम के स्थान (शहर) की दूरी, नियोक्ता (मालिक) की नौकरी देने की प्रतिबद्धता और मूल गाँव में आजीविका के अवसर, लौट कर आए प्रवासियों के फैसले का आधार हैं, कि वे लॉकडाउन समाप्ति के बाद प्रवास करें या नहीं। तब तक वे उपलब्ध संसाधनों से ही सामंजस्य बैठाते हैं

July 14, 2020

लौटे प्रवासी: एक विराम या एक सपने का अंत?

लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों को घर लौटने के लिए मजबूर कर दिया है। नकद बचत के बिना और काफी समय से फंसी पगार के कारण, उनका भविष्य इतना अनिश्चित है, जितना पहले कभी नहीं था

June 11, 2020

तिरूपुर में फंसे ‘चकमा’ लोगों में, निराशाजनक संभावनाओं को लेकर चिंता

बुने हुए वस्त्रों के उद्योग के पूरी तरह बंद हो जाने के कारण, चकमा आदिवासी, जो गरीबी से बचने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों से तमिलनाडु चले गए थे, स्वयं को पहले जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में पा रहे हैं