गुरविंदर सिंह
March 25, 2021

बंगाल की पारम्परिक ‘लाख’ की बनी गुड़िया का भविष्य धुंधला है

माँग की कमी के साथ-साथ कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण, पश्चिम बंगाल में लाख (लाख कीड़े से मिलने वाला लाल रंग का कुदरती पदार्थ, जिसका उपयोग वार्निश, मोहर-सील, चूड़ियों आदि में होता है) की गुड़िया के लिए मौत की घंटी बज गई है, जब केवल एक कारीगर इस पर काम कर रहा है

February 18, 2021

लॉकडाउन के दौरान बाउल गायकों ने प्रदर्शन के लिए अपनाया डिजिटल माध्यम

पारम्परिक बाउल गायन में लगे, बंगाल के लोक गायकों पर लॉकडाउन का बहुत प्रभाव पड़ा। उनकी जीविका में और कला को जीवित रखने में उन्हें टिकट-आधारित जीवंत प्रस्तुति से मदद मिली है

January 21, 2021

गंजम के किसानों के लिए, नकद फसल कपास ने खोई चमक

कपास की फसलों से अच्छी आमदनी की सम्भावना के बावजूद, ढुलाई और मार्केटिंग की सुविधाओं के अभाव और निजी साहूकारों द्वारा शोषण के कारण, उत्पादकों को अन्य फसलों की खेती के लिए मजबूर होना पड़ा है।

December 29, 2020

तालाबों के जीर्णोद्धार से हुआ कृषि का पुनरुद्धार

अच्छी बारिश के बावजूद, पानी के रख रखाव के अभाव में किसानों का पलायन हुआ। बारिश के पानी को संग्रहित करने के लिए, तालाबों को गहरा करने से पलायन रुक गया है और किसानों को सभी मौसम में फसलें उगाने में मदद मिली है

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